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रिपोर्ट में राफेल डील पर बड़ा खुलासा, रक्षा मंत्रालय ने डील में पीएमओ के हस्तक्षेप का किया था विरोध

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पिछले कुछ समय से राफेल विमान डील को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरती आई है। अब जब चुनाव नज़दीक है तो कांग्रेस ने

एक बार फिर इस मुद्दे पर ज़ोर देना शुरू कर दिया है। इसी बीच अब खुलासा सामने आ रहा है। खुलासा हुआ है कि रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस के साथ रफ़ाल सौदे की बातचीत में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल पर आपत्ति जताई थी।

वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने अखबार ‘द हिंदू’ में 24 नवंबर, 2015 को लिखे रक्षा मंत्रालय का पत्र का हवाला देते हुए एक लेख लिखा है जिसमे उन्होंने चौकाने वाले खुलासे किये है। इस पत्र में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर को पीएमओ के हस्तक्षेप की जानकारी दी गई थी। इस लेख में दावा किया गया है कि 7.87 बिलियन पौंड की राफेल डील में रक्षा मंत्रालय की पीएमओ द्वारा फ्रांस से ‘समानंतर बातचीत’ पर आपत्ति की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, लेख में सामने आए रक्षा मंत्रालय के मनोहर परिकर को लिखे पत्र में कहा गया था, पीएमओ के दखल के चलते बातचीत कर रहे भारतीय दल और रक्षा मंत्रालय की पोज़िशन कमज़ोर हुई।

पत्र में मनोहर परिकर से कहा गया था कि हम पीएमओ को सुझाव दे सकते है कि जो भी अधिकारी भारतीय वार्ता समूह का हिस्सा नहीं है वह सौदे के संबंध में फ्रांस के अधिकारियू से बातचीत न करें। इस पत्र में यह भी कहा गया कि अगर पीएमओ रक्षा मंत्रालय की बातचीत पर भरोसा नहीं है तो उसे पीएमओ  की अगुवाई में नए सिरे से बातचीत शुरू करनी चाहिए।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देख रहा था तब सरकार ने कहा था कि वायुसेना उप प्रमुख की अगुवाई में 7 सदस्यीय टीम ने रफ़ाल सौदे  पर बातचीत की लेकिन सरकार ने पीएमओ की भूमिका की बात नहीं कबूली थी। सरकार ने कोर्ट में बताया था कि राफेल डील के लिए मोल-भाव में 7 सदसीय टीम शामिल थी जिसका नेतृत्व वायु सेना के डिप्टी चीफ कर रहे थे।

चुनावी माहौल में इस खुलासे को एक बड़ा खुलासा माना जा रहा है और इस खुलासे के बाद एक बार कांग्रेस काफी मुखरता से भाजपा की मोदी सरकार के खिलाफ मैदान में आ गयी है।

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