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उत्तर प्रदेश में दलित हेल्प सेंटर खोलेगी कांग्रेस, निकालेगी संविधान बचाओ पदयात्रा

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विधानसभा चुनावों की तर्ज पर लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस एक बार फिर दलितों को पार्टी से जोडऩे के लिए जिलावार दलित हेल्प सेंटर खोलेगी। इसी के साथ एससी/एसटी समुदाय को संविधान में मिले अधिकारों के प्रति जागरुक करने और भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संविधान का उल्लंघन कर एससी/एसटी के विरोध में किये जा रहे कामों की जानकारी संविधान बचाओ पदयात्रा के माध्यम से दी जाएगी।

विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन राउत के निर्देश पर विभाग के प्रांतीय चेयरमैन भगवती प्रसाद चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संविधान बचाओ पदयात्रा के दौरान कांग्रेसी अनुसूचित जाति के लोगों के साथ सम्पर्क कर संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

विभाग की वाइस चेयरमैन और मीडिया प्रभारी सिद्धिश्री ने बताया कि बैठक में विभाग की ओर से दलितों के हितों के लिए जिलावार दलित हेल्प सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया। दलित हेल्प सेंटर में एससी/एसटी वर्ग के पीडि़त लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अगले माह से आरम्भ होने वाली संविधान बचाओ पदयात्रा में विभाग के पदाधिकारी व कार्यकर्ता अनुसूचित जाति के लोगों को कांग्रेस पार्टी की ओर से एससी/एसटी समुदाय के विकास और हित में किये गये कामों का प्रचार करेंगे। समाज को अवगत कराएंगे कि कांग्रेस ने दलित, शोषित और वंचित समाज को मुख्य धारा से जोड़ कर समाज के सर्वांगीण विकास और उनके कानूनी अधिकारों की हमेशा रक्षा की है।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में अपराध और अराजकता लगातार बढ़ रही है। आये दिन सरेआम दलित महिलाओं के साथ अत्याचार, बलात्कार और हत्या की जा रही है। उन्हें समुचित न्याय नहीं मिल पा रहा और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। एससी/एसटी अधिनियम का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा। विभाग इसके लिए जिला स्तरीय कोआर्डिनेटर नियुक्त करेगा, जो विधिक अधिकार दिलाने के लिए काम करेगा।

सिद्धिश्री ने बताया कि अनुसचित जाति विभाग की ओर से बीती 23 अप्रैल को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में संविधान बचाओ-देश बचाओ कार्यक्रम का आरम्भ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किया था। इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन वर्ष भर विभाग की ओर से किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य शोषित, वंचित, दबे-कुचले लोगों को सामाजिक न्याय और संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत बराबरी का दर्जा मिलना है।

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