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महाराष्ट्र सीएम देवन्द्र फडणवीस से मिला आश्वासन तो अन्ना हज़ारे ने ख़त्म किया अपना अनशन

7 दिनों तक अनशन पर बैठने के बाद अन्ना हजारे ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन और सुभाष भामरे की मुलाकात के बाद ही उन्होंने अपने अनशन को खत्म करने का ऐलान किया।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले ही एना हज़ारे ने केंद्र सरकार को धमकी दी कि अगर 8 फरवरी तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती है तो वह पद्म विभूषण पुरस्कार वापस लौटा देंगे। यह पुरस्कार 1992 में नरसिम्हा राव की सरकार ने दिया था।

अन्ना हजारे का कहना है कि लोकपाल को लागू करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को 30 से ज्यादा पत्र लिखे थे लेकिन उनकी मांग पर कुछ भी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार केंद्र में लोकपाल और राज्य में केवल लोकायुक्त नियुक्त किया जा सकता है लेकिन वादे किये जाने के बाद भी लागू नहीं किया गया।

अन्ना की मांग है कि महाराष्ट्र सरकार मुख्यमंत्री कार्यालय को लोकायुक्त के दायरे में लाए और इसमें केवल पूर्व मुख्यमंत्री नहीं बल्कि वर्तमान के मुख्यमंत्री को भी शामिल किया जाए।

बता दें कि अन्ना हजारे 30 जनवरी को अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठे थे और उन्होंने सीधे तौर पर मांगी थी कि लोकपाल की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाए। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि साल 2014 में उनके आंदोलन का फायदा उठाकर भाजपा सत्ता में आई थी और सत्ता में आने के बाद उन्होंने अन्ना की मांगों को दरकिनार कर दिया था।

चुनाव नजदीक है और ऐसे में अन्ना हजारे का अनशन को बारीकी से देखा जा रहा था। माना जा रहा था कि यह अनशन लंबा चलेगा जैसे साल 2014 में कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ था लेकिन आश्वासन मिलने के बाद ही अन्ना हजारे ने अनशन खत्म कर दिया है।

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